शनिवार, 10 अक्टूबर, 2026
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बड़वाह-धामनोद फोरलेन: 70 फीट के दायरे में आ रहीं कई दुकानें, आरओबी का पंगा अभी बाकी

मनीष शर्मा 9826646557
संपादक / रिपोर्टरमनीष शर्मा 9826646557

राजस्व विभाग और एमपीआरडीसी (MPRDC) का संयुक्त सीमांकन कार्य अब है आखिरी पड़ाव पर

स्वतंत्र लोकतंत्र। बड़वाह। बड़वाह-धामनोद फोरलेन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ने अब पकड़ी ‘हाई-स्पीड’! राजस्व विभाग और एमपीआरडीसी (MPRDC) का संयुक्त सीमांकन कार्य अब अपने आखिरी पड़ाव पर है। शुक्रवार को बड़वाह के महेश्वर रोड स्थित जयस्तंभ चौराहे की तरफ लाल रंग से मार्किंग का काम धड़ाधड़ किया गया।
फिलहाल बाईपास अंडरपास से लेकर जयस्तंभ तक सड़क के सेंटर (बीच) से दोनों तरफ 35-35 फीट (कुल 70 फीट) पर निशान लगाए जा रहे हैं। इस 70 फीट की जद में आने वाली सभी जमीनों, दुकानों और मकानों की नाप-जोख कर परिसंपत्तियों की सूची बनाई जा रही है।

‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना’ – काम से ज्यादा तमाशबीनों का मेला!
जैसे ही एमपीआरडीसी की टीम फीता और चूना लेकर सड़क पर उतरी, महेश्वर रोड पर अफरा-तफरी और कौतूहल का माहौल बन गया। व्यापारी और रहवासी तो अपनी दुकानों-मकानों का नाप देखकर चिंतित थे ही, लेकिन मजमा लगाने वाले लोग भी कम नहीं थे। हालात यह थे कि ‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना’ की तर्ज पर जिनका इस नपती से ₹1 का नुकसान नहीं होना था, वे भी काम-काज छोड़कर खड़े हो गए। लोग अपनी चिंता छोड़कर दूसरों की दुकानों पर नजरें गड़ाए बैठे थे कि— “अरे भाई! शर्मा जी की दुकान कितनी फीट टूटेगी?” या “वर्मा जी का काउंटर 35 फीट के दायरे में आ रहा है या नहीं!”

अभी पिक्चर बाकी है! आरओबी का दूसरा ‘झटका’ आना तय

यदि आपको लग रहा है कि 35 फीट की मार्किंग के बाद महेश्वर रोड वालों की मुसीबत खत्म हो जाएगी, तो जनाब रुकिए! असली कहानी तो रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) के फाइनल प्लान में छिपी है। एमपीआरडीसी के साइड इंजीनियर दीपक विश्वकर्मा ने साफ कर दिया कि यह मार्किंग सिर्फ फोरलेन सड़क के लिए है, रेलवे के आरओबी से इसका कोई लेना-देना नहीं है। इसका सीधा-सा मतलब यह है कि साईं हॉस्पिटल से लेकर खंडेलवाल बेकरी तक जब आरओबी का फाइनल नक्शा आएगा, तो दोबारा नपती होगी! आरओबी के दोनों तरफ 15-15 फीट का सर्विस रोड बनना प्रस्तावित है, यानी यहाँ अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की ‘तलवार’ फिर से लटकेगी।

दुबली गाय और दो आषाढ़!

महेश्वर रोड के व्यापारियों और रहवासियों के लिए तो वही कहावत चरितार्थ हो रही है— “दुबली गाय और दो आषाढ़!” यानी एक तो पहले से ही फोरलेन अधिग्रहण का दर्द, और ऊपर से आरओबी के दोबारा सीमांकन का डर। व्यापारियों के माथे पर अभी से चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं। सीमांकन के दौरान MPRDC के इंजीनियर्स के साथ पटवारी शांताराम पवार, आलोक (पटवारी), वार्ड नंबर 10 के पार्षद विष्णु वर्मा, अज़हर तवर सहित बड़ी संख्या में घबराए हुए और उत्सुक रहवासी मौके पर मौजूद रहे। अब देखना यह है कि मुआवजा वितरण और सड़क निर्माण का वास्तविक काम धरातल पर कब शुरू होता है!

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