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शक्कर के बाद अब दूध के भाव में भी उबाल की तैयारी

सागर जाट 8319794486
संपादक / रिपोर्टरसागर जाट 8319794486


किसानों ने की 01 सितंबर से दूध खरीदी भाव बढ़ाने की मांग

स्वतंत्र लोकतंत्र। बड़वाह। महंगाई की मार से पूरा देश त्रस्त हो रहा है। शक्कर के बाद अब दूध के भाव में भी उबाल की तैयारी चल रही है। 1 सितंबर से दूध की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हो सकती है।  इस वर्ष अप्रैल के बाद यह दूसरा मौका होगा जब दूध के दाम बढ़ेंगे। सोमवार को भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में दुग्ध उत्पादक और पशुपालकों की कृषि उपज मंडी में बैठक सम्पन्न हुई । जिसमें दूध में  बढ़ती लागत के कारण दूध की खरीदी मूल्य में वृद्धि की मांग की है । बैठक के बाद किसानों ने एकजुट होकर एक वाहन रैली निकाली। उन्होंने दुग्ध व्यापारी संघ के अध्यक्ष निलेश खंडेलवाल को अपना मांग पत्र सोपा। जिसमें उन उनकी समस्याओं मांगों का उल्लेख था।  किसानों ने बताया कि पशुपालन अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है। उनके अनुसार खली का भाव 4800 प्रति क्विंटल और भूसा 1300 से ₹1400 क्विंटल तक पहुंच गया है पशुओं की दवाइयां में भी 40 से 50% की वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त बिजली,, मजदूर और पेट्रोल डीजल के खर्चे में भी बढ़ोतरी हुई है ।एक नई गए या भैंस खरीदने पर पशु 60000 से ₹70000 तक का इजाफा हुआ है जिससे नया खरीद पशु खरीदना आम किसान के लिए मुश्किल हो गया है. भारतीय किसान संघ के जिला उपाध्यक्ष नाजिम खान ने बताया कि वर्तमान में व्यापारी किसानों से 57 रुपए प्रति लीटर दूध खरीद कर उपभोक्ताओं को 65 रुपए लीटर बेच रहा है। किसानों की मांग है कि व्यापारियों द्वारा खरीद भाव बड़ा कर कम से कम 62 रुपए लीटर किया जाए ताकि उनका नुकसान कम हो। मांग पत्र सौंपने के दौरान संघ अध्यक्ष और किसानों के बीच भाव वृद्धि को लेकर बहस हुई व्यापारी संघ₹2 प्रति लीटर वृद्धि के पक्ष में था। जबकि किसान ₹5 लीटर की बढ़ोतरी पर अड़े रहे।  दुग्ध उत्पादकों का उत्पादन से लेकर दुकान तक परिवहन का पूरा खर्च भी वे खुद उठाते हैं। जबकि व्यापारी काउंटर पर बैठकर सीधे आठ रूपए प्रति लीटर कमाई करते हैं।
अब देखना हे कि शक्कर के बाद अगर दूध के भाव भी बढ़ते हे तो यह आमजन के लिए महंगाई का एक और कड़ा प्रहार हो सकता है।

गरीब की “कट” भी हो सकती है महंगी
पूरे दिन मेहनत करने वाले मजदूर अपने काम के बीच दिन में दो तीन बार छोटी छोटी चाय की दुकान पर चाय के कट की चुस्की लेते नजर आते हैं। जिससे उनकी थकान को वो दूर करने की कोशिश करते हैं। किंतु अब शक्कर के बाद जिस प्रकार दूध के भाव भी बढ़ाने की कवायद शुरू हो चुकी है। तो लगता हे कि अब गरीब की चाय की कट जो अभी तक पांच से सात रुपए में मिलती है वो भी दस से बारह रुपए हो सकती है। जिससे गरीब लोगों का चाय पीना भी दुश्वार हो जावेगा।

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